Sunday, 31 July 2011

हुआ  महरूम  खुद  से  ही  और  खुद  में  ही  मैं  खो  बैठा ,
अपनी  तकदीर  पे  हंसकर  हंसी  पे  खुद  के  रो  बैठा ,
चला  था  चेहरे  से  अपने  निशान-ए-अश्क  मिटने  को ,
मगर  घबरा  के  जल्दी  में  अपनी  मुस्कान  धो  बैठा......


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