वक़्त के पैरों में चुभी हर दर्द निकाल देते हैं ,
ठोकरों को भी मुस्कराहट भरा सवाल देते हैं ,
लोग कहते हैं दिल के बदले पत्थर उछालना ठीक नहीं ,
हम तो चट्टानों पे अक्सर अपना दिल उछल देते हैं .........
ज़ख्मों के निशां दिखते हैं पर, कोई ज़ख्म गहरा नहीं दिखता,
ख्वाबों में तेरी डोली दिखती है, अपने सर पर शेहरा नहीं दिखता,
जो देखना चाहे कभी दर्पण कि नजरों से खुद को ये "गुंजन",
सबकुछ आता है नजर बस, आइने में मेरा चेहरा नहीं दिखता....
कुछ धूमिल से सपने ..........कुछ बेगाने कुछ अपने,
छूते कल रात सिलवटों में बेबाक पल्टे करवटों में,
आँख खुली जब होश आया .....खुदको यादों में लिपटा पाया,
उगते सूरज ने आहट दी पहली किरण ने मुस्कराहट दी ,
दिल ने टोका कहाँ खो गया ..उठ जा भाई सवेरा हो गया,
बाहर ठंडी हवाओं ने गले लगाया तब दिल को सुकून आया,
चिड़ियों ने कहा सब फलकारक हो फिर नयी सुबह मुबारक हो ........
खुद अपनी इबादत करने पर रब की इनायत होती है,
जब दिल के तार कोई छेड़े उस रोज क़यामत होती है,
अपनी तो हर राह हमने खुद चुनी है जीने को ,
नसीब से जीनेवालों को किस्मत से शिकायत होती है .......
मेरे किस्मत की हथेली पर कोई लकीर नहीं मिलती,
जो बांधे बदनसीबी को ऐसी जंजीर नहीं मिलती,
बहुत कोशिश हूँ करता की मिटा दूँ याद सब उनके ,
छुपा रखा है जो दिल ने वो एक तस्वीर नहीं मिलती ...
नई मंजिल है नए रास्ते हैं अब लेकिन ,
कहीं पर हैं मेरे कुछ निशान बाकी अभी ...
ये दिल बड़ा नादान है जो नशे में फर्क न कर सका,
ये उदास है तो ये सोचकर ....की तू मैकदे में क्यूँ आ गई........!!
जिंदगी में हर किसीको मिलता है दोराहा कभी न कभी,
अपनी नसीब मुझे मिल गया चौराहा पहले ही मोड़ पर .......
इशारों से वक़्त की लकीर बदल देते हैं,
वो अक्सर पलकों से तस्वीर बदल देते हैं,
न झांके कोई उनकी निगाहों में कभी भूल से ......
वो आँखों ही आँखों में तकदीर बदल देते हैं ...
सूखे पत्तों को जैसे बहारे छांट देती है,
दिलो को मजहबों की शिलाएं बाँट देती है,
किसी की इबादत अब भला कैसे करे ये दिल ......
इनायत में सर झुके जो ...तलवारे काट देती हैं .......!!
कुछ टुकड़े अपने करो कुछ अपने अरमानो के,
सरहदें रोज बनती हैं किस्मत में इंसानों के ......
मन, मछली बिन पानी
तैरने की कोशिश करता है,
रेत पर फरफराता
कणों की चोट से
टुकडो में मौत मरता है,
चील कौवे जिस्म में
चोच गरने को बेताब से,
चन्द सपनो की आड़ में
कई तकलीफ से गुजरता है ....
ख्वाबों में जीने की आदत है, हकीकत से दिल बेखबर लगता है,
तनहा रहता हूँ अक्सर , मुझे दोस्तों की, नसीहत से डर लगता है,
बड़ी अजीब निगाहों से देखता हूँ सबको मैं सुबह आँख खुलने पर ,
कहाँ आ गया हूँ , मुझे अब तो बेगाना मेरा अपना ही घर लगता है.......
जिंदगी ये अक्सर कई बार करती है,
किनारे खड़े हो बस इंतज़ार करती है,
अपनी मज़बूरी का रोना अब क्या रोये,
हथेली आंसू पोछने से इनकार करती है .......