Wednesday, 11 January 2012

कुछ  धूमिल  से  सपने ..........कुछ  बेगाने  कुछ  अपने,
छूते  कल  रात  सिलवटों  में  बेबाक  पल्टे  करवटों  में,
आँख  खुली  जब  होश  आया .....खुदको  यादों  में  लिपटा पाया,
उगते  सूरज  ने  आहट  दी  पहली  किरण  ने मुस्कराहट  दी ,
दिल  ने  टोका  कहाँ  खो  गया ..उठ  जा  भाई  सवेरा  हो  गया,
बाहर  ठंडी  हवाओं  ने  गले  लगाया  तब  दिल  को  सुकून  आया,
चिड़ियों  ने  कहा  सब  फलकारक  हो  फिर  नयी  सुबह  मुबारक  हो ........
 

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