Wednesday, 11 January 2012

ख्वाबों  में  जीने  की  आदत  है, हकीकत  से  दिल  बेखबर  लगता  है,
तनहा  रहता  हूँ  अक्सर , मुझे  दोस्तों  की, नसीहत  से  डर  लगता  है,
बड़ी  अजीब  निगाहों  से  देखता  हूँ  सबको  मैं सुबह  आँख  खुलने  पर ,
कहाँ  आ  गया  हूँ , मुझे  अब  तो  बेगाना  मेरा  अपना  ही  घर  लगता  है.......
 
 

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